चौघड़िया

स्थान:

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दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और उसके बाद की रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) — प्रत्येक को 8 समान भागों में बाँटा जाता है, जो एक निश्चित वार-क्रम से नामित होते हैं। यह छोटे, रोज़मर्रा के कार्यों (यात्रा आरंभ, खरीदारी, कोई महत्वपूर्ण कॉल) के लिए सर्वोत्तम है — बड़े जीवन-कार्यों (विवाह, गृह प्रवेश, व्यापारारंभ) के लिए इसके बजाय समर्पित मुहूर्त पृष्ठों का उपयोग करें, जो अकेले चौघड़िया से कहीं अधिक कारकों को तौलते हैं।

स्थान के अनुसार: Bhopal, Bhopāl, Madhya Pradesh (latitude 23.255°, longitude 77.403°)

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सूर्योदय 05:34 · सूर्यास्त 19:02 · अगला सूर्योदय 05:34 (next day)

दिन का चौघड़िया (सूर्योदय → सूर्यास्त)

#समयनामप्रकृति
1 05:34 – 07:15 काल अशुभ
2 07:15 – 08:56 शुभ शुभ
3 08:56 – 10:37 रोग अशुभ
4 10:37 – 12:18 उद्वेग अशुभ
5 12:18 – 13:59 चल सम
6 13:59 – 15:40 लाभ शुभ
7 15:40 – 17:21 अमृत श्रेष्ठ
8 17:21 – 19:02 काल अशुभ

रात्रि का चौघड़िया (सूर्यास्त → अगला सूर्योदय)

#समयनामप्रकृति
1 19:02 – 20:21 लाभ शुभ
2 20:21 – 21:40 उद्वेग अशुभ
3 21:40 – 22:59 शुभ शुभ
4 22:59 – 00:18 (next day) अमृत श्रेष्ठ
5 00:18 (next day) – 01:37 (next day) चल सम
6 01:37 (next day) – 02:56 (next day) रोग अशुभ
7 02:56 (next day) – 04:15 (next day) काल अशुभ
8 04:15 (next day) – 05:34 (next day) लाभ शुभ

अमृत और शुभ सर्वाधिक शुभ हैं; लाभ और चल कार्य-योग्य हैं; रोग, काल और उद्वेग को किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए टालना सर्वोत्तम है।

शुभ व अशुभ समय शनिवार, 31 मई 2025

शुभ

  • ब्रह्म मुहूर्त‡ 04:10 AM – 04:52 AM
  • अभिजित मुहूर्त 11:51 AM – 12:45 PM
  • गोधूलि मुहूर्त† 06:38 PM – 07:26 PM
  • निशीथ मुहूर्त‡ 11:57 PM – 12:39 AM, जून 01

अशुभ

  • राहु काल08:56 AM – 10:37 AM
  • यमगंड01:59 PM – 03:40 PM
  • गुलिक काल05:34 AM – 07:15 AM
  • दुर्मुहूर्त
    05:34 AM – 07:22 AM  ·  08:16 AM – 09:10 AM  ·  01:39 PM – 04:21 PM  ·  06:08 PM – 08:27 PM  ·  10:33 PM – 11:57 PM
  • वर्ज्य(त्याज्य-काल)
    05:21 AM – 06:55 AM (पुष्य)

चंद्र राशि कर्क · नक्षत्र पुष्य.
† श्लोक इसे गुणात्मक रूप से नामित करता है (बृहत् संहिता 103.13); दिखाई गई सटीक अवधि एक गणनात्मक पुनर्निर्माण है, श्लोक-कथित नहीं। ‡ ऊपर दुर्मुहूर्त के समान 15-समान-मुहूर्त रात्रि-विभाजन से पहचाना गया; इस सटीक आँकड़े को देने वाला कोई सीधे-उद्धृत श्लोक नहीं मिला, अतः यह परंपरा-संगत है, प्राथमिक उद्धरण नहीं। यहाँ हर अन्य आँकड़ा एक सीधे गणनीय शास्त्रीय या नामित-संकलन नियम है जो इस साइट पर पहले से उपयोग में है।